Essay on politics in hindi. Essay on the Political System Theory 2022-12-23

Essay on politics in hindi Rating: 9,3/10 1078 reviews

हालांकि हमारे समाज में राजनीति एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन इससे जुड़े मुद्दों को ध्यान में रखते हुए भी हमें यह सोचना चाहिए कि राजनीति सिर्फ एक शब्द ही नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन का एक अहम हिस्सा है। राजनीति हमारे समाज की नींव, संस्थान और समाजवाद से जुड़ी है। इसलिए, हमें राजनीति से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।

राजनीति एक ऐसा माध्यम है जो हमारे समाज में समस्याओं का हल खोजने और उनका समाधान करने में मदद करता है। राजनीति हमारे समाज में समस्याओं को हल खोजने और उनका समाधान करने में मदद करती ह

Essay on Politics in Hindi

essay on politics in hindi

The Prime Minister is elected in India every 5 years. सार्वजनिक सम्पत्ति की रक्षा करना और हिंसा का त्याग करना; 10. Congress party is the oldest party in India. There are several major political parties in India. विशेष्यज्ञ इसके पक्ष और विपक्ष में अपना तर्क देते हैं.

Next

राजनीति के विषय पर बेहतरीन निबंध

essay on politics in hindi

नीति निर्देशक तत्त्वों की रग्ग्ष्ट व्याख्या है, 9. Once you downloaded the PDF file you can access it offline any time you want. In the long way it increases the productive capacity of the population and help build a healthier and a stronger workforce which is a necessary part of any growth strategy. इससे वैमनस्य बढ़ता है. The several institutions that exist within the governing system include the legislative body that is responsible for making laws, executive body that imposes them, and judiciary that interprets them thus providing a powerful and well-rounded political spectrum.

Next

Essay on Indian Politics

essay on politics in hindi

Subsidy should be given only to targeted needy people to lower of burden of freebies on the economic health of the state or the central government. अतः विद्यालयों को विद्या-प्राप्ति का आदर्श स्थल बनाने के लिए वहाँ राजनीति का प्रवेश बिलकुल नहीं होना चाहिए. स्वतन्त्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आन्दोलनों को प्रेरित करने वाले उच्चादर्शो को संजोये रखकर उसका पालन करना, 3. Offering freebies has an impact on the public exchequer and most of the Indian states do not have a robust financial health that can be utilised for freebies and for overall development. Arguments in Favour of Freebies In the last 30 years there has been rising inequality.

Next

Essay on Politics for Students in English

essay on politics in hindi

संघ का स्वरूप कार्यपालिका: संघीय कार्यपालिक के शीर्ष पर भारत के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति तथा प्रधानमन्त्री के नेतृत्व में एक मन्त्रिपरिषद् होता है । सघ की कार्यपालिका की शक्ति अनुच्छेद 53 के अनुसार राष्ट्रपति में निहित होती है । इसका प्रयोग वह संविधान के अनुसार स्वयं अथवा अपने अधीनस्थ कर्मचारियों द्वारा करेगा । राष्ट्रपति: राष्ट्रपति का निर्वाचन एक निर्वाचक मण्डल के सदस्य आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा करते हैं । इस निर्वाचक मण्डल में संसद के दोनों सदनों एवं राज्यों की विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्य होते हैं । राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्षो का होता है । वह इस पद पर पुन: चुना जा सकता है । उसे अनुच्छेद 61 में निहित कार्यविधि एवं महाभियोग द्वारा हटाया जा सकता है । कार्यपालिका के सभी अधिकार राष्ट्रपति में निहित हैं । वह इसका प्रयोग संविधान के अनुसार कर सकता है । रक्षा सेनाओं की सर्वोच्च कमान भी राष्ट्रपति के पास होती है । राष्ट्रपति को संसद का अधिवेशन बुलाने, उसे स्थगित करने, उसमें भाषण देने, लोकसभा भंग करने, संवैधानिक, संकटकालीन स्थितियों में अध्यादेश जारी करने, अपराधी की सजा कम करने, माफ करने, उसमें परिवर्तन करने का अधिकार है । किसी राज्य में संवैधानिक व्यवस्था असफल हो जाने पर उस सरकार के सम्पूर्ण अधिकार तथा कुछ अधिकार राष्ट्रपति के पास आ जाते हैं । संकटकालीन परिस्थितियों, बाह्य आक्रमण, युद्ध तथा विद्रोह के समय आपातकाल की घोषणा कर सकता है । आर्थिक संकट की स्थिति में सरकारी कर्मचारियों के वेतन में कमी भी कर सकता है । वह प्रधानमन्त्री की सलाह से मन्त्रिपरिषद के सदस्यों को पद व गोपनीयता की शपथ दिलाता है । वह उपराष्ट्रपति, राज्यपालों, न्यायाधीशों, मुख्य न्यायाधीश, लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष आदि की नियुक्ति करता है । राष्ट्रपति की अनुमति के बिना कोई भी वित्त विधेयक संसद में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता है । उपराष्ट्रपति: उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है । जब राष्ट्रपति बीमारी या अन्य किसी कारण से कार्य करने में असमर्थ रहता है, तो नये राष्ट्रपति के चुने जाने तक वह कार्यवाहक राष्ट्रपति होता है । उपराष्ट्रपति का चुनाव भी आनुपातिक प्रतिनिधित्व के एकल संक्रमणीय मत द्वारा दोनों सदनों के सदस्य एवं निर्वाचक मण्डल के सदस्यों द्वारा होता है । इनका कार्यकाल 5 वर्ष का होता है । मन्त्रिपरिषद: यद्यपि राष्ट्रपति को गणतन्त्र का संवैधानिक अध्यक्ष माना गया है, तथापि वास्तविक धरातल पर सर्वाधिक शक्तिशाली संस्था व सत्ता और राजनीति का स्त्रोत मन्त्रिपरिषद है । प्रधानमन्त्री ही वास्तविक कार्य निबाहता है । संविधान के अनुच्छेद 352 में राष्ट्रपति को आपातकालीन स्थिति का विशेषाधिकार दिया गया है, लेकिन वह आपातकाल तभी लगा सकता है, जब उसे मन्त्रिमण्डल का लिखित परामर्श मिल जाये । प्रधानमन्त्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है तथा अन्य मन्त्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति प्रधानमन्त्री की सलाह से करता है । प्रधानमन्त्री का कर्तव्य है कि वह भारत संघ के कार्यो, प्रशासन, मन्त्रिपरिषद् के निर्णयों व कानूनों से राष्ट्रपति को अवगत कराता रहे । मन्त्रिपरिषद् में 3 तरह के मन्त्री होते हैं: 1. मैनिंग का विचार है कि राष्ट्र-राज्य पर आधारित परम्परागत Classical अन्तर्राष्ट्रीय व्यवस्था अब भी पुष्ट और सशक्त है । जबकि जॉन हर्ज और केनेथ बोल्डिंग मानते हैं कि पुरानी अन्तर्राष्ट्रीय व्यवस्था परमाणु युग में बेकार हो गयी है । यद्यपि राष्ट्र-राज्य का अस्तित्व मौजूद है तथापि राष्ट्र-राज्य की संरचना और प्रकार्यों में धीमी गति से बदलाव आ गए हैं । इन बदलावों से राष्ट्र-राज्य की बुनियादी विशेषता सम्पभुता की परम्परागत धारणा में भी कुछ गम्भीर परिवर्तन आए हैं जिनका प्रभाव अन्तर्राष्ट्रीय व्यवस्था के प्रकार्य और स्वरूप पर भी पड़ा है । माइकेल हास नामक विद्वान ने इसी पद्धति का अनुसरण करते हुए 20 अन्तर्राष्ट्रीय उप-पद्धतियों Sub-System का विश्लेषण किया है । इनमें से 10 उप-पद्धतियां यूरोप में 1849 से 1963 तक की अवधि में प्रचलित थीं, 1689 से 1964 की अवधि में एशिया में पांच का तथा 1738 से 1898 की अवधि में हवाई में पांच पद्धतियों का प्रचलन था । रोजक्रेंस नामक विद्वान ने 1740 से 1960 तक के यूरोप के इतिहास में 9 उप-पद्धतियों का वर्णन किया है । बाद में सम्पूर्ण विश्व परिप्रेक्ष्य में विभिन्न क्षेत्रीय व्यवस्थाओं; जैसे मध्य-पूर्व, दक्षिण-पूर्व एशिया, पश्चिम यूरोप, पश्चिम अफ्रीका, लैटिन अमरीका का उप-व्यवस्थाओं के रूप में तुलनात्मक विश्लेषण हुआ है । बर्टन ने भी व्यवस्था सिद्धान्त के आधार पर अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति का अध्ययन प्रस्तुत किया है । Essay 6. प्रस्तावना: प्राय: सभी लोकतान्त्रिक देशों में संविधान द्वारा नागरिकों को कुछ अधिकार दिये गये हैं । ये अधिकार सामाजिक जीवन की वे बुनियादी परिस्थितियां हैं, जिसके बिना साधारणत: कोई मनुष्य अपना पूर्ण विकास नहीं कर पाता । इन्हीं अधिकारों के फलस्वरूप नागरिक स्वतन्त्रताओं का उपयोग और अपने व्यक्तिव का सर्वागीण विकास करते हैं । भारत के नागरिकों को भी संविधान द्वारा कुछ महत्त्वपूर्ण अधिकार दिये गये हैं । कानून की भाषा में इसे मौलिक अधिकार कहते हैं । ये अधिकार दो प्रकार से मौलिक हैं: 1. After the news of negative effect of freebie politics in Sri Lanka, various Indian states has come under lens. इस बारें में भारतीय चिन्तन स्पष्ट कहता है कि धर्म का स्थान ऊँचा है. या संविधान लागू होने के पांच वर्षो पूर्व भारत में रह रहा हो । 5. विद्यार्थी अवस्था में उसका ध्यान केवल और केवल विद्या प्राप्ति की ओर होना चाहिए.


Next

Essay on Freebie Politics

essay on politics in hindi

वह नागरिकों के अधिकारों एवं स्वतन्त्रता की रक्षा करता है । स्वस्थ लोकमत के लिए जनता का शिक्षित व जागरूक होना अत्यन्त आवश्यक है । 5. जो छात्र इस काल में भटक जाते है, वे जीवनभर उसका दुष्परिणाम भुगतते है. राज्य तथा उपमन्त्री । 9. भारतीय संविधान का ढांचा: भारत का संविधान ब्रिटेन की संसदीय प्रणाली के नमूने पर बनाया गया है । मौलिक अधिकार, उपराष्ट्रपति, उच्चतम न्यायालय का गठन एवं शक्तियां तथा न्यायिक पुनर्विलोकन संयुक्ता राज्य अमेरिका से, संघात्मक व्यवस्था कनाडा से, आयरलैण्ड से नीति निर्देशक तत्त्व, राष्ट्रपति चुनाव प्रणाली जर्मनी से, आपात उपबन्ध तथा मौलिक कर्तव्य सोवियत रूस से, गणतन्त्र फ्रास से, आस्ट्रेलिया से समवर्ती सूची, प्रस्तावना की भाषा तथा केन्द्र राज्य के बीच शक्तियों का विभाजन दक्षिण अफ्रीका से, संविधान संशोधन जापान से व कानून द्वारा स्थापित शब्दावली ग्रहण की गयी । भारत का संवैधानिक ढांचा चार परिशिष्टों में है: 1. उसके अनुसार राजनीति का एक ही धर्म हैं — संविधान.

Next

भारतीय राजनीति पर निबंध

essay on politics in hindi

Short Politics Essay in English Politics, in general, is the platform by which people create, maintain, and change the laws that govern their lives. These parties support legislative bills or reforms and the candidates based on the agenda agreed upon by the members. मौलिक अधिकारों पर रोक: यदि सरकार नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन करती है, तो नागरिक सरकार के विरुद्ध न्यायपालिका की शरण में जा सकता है । सर्वोच्च न्यायालय उक्त कार्रवाई को अवैध घोषित कर सकता है । भारतीय संविधान के 352वें अनुच्छेदानुसार राष्ट्रपति द्वारा आपातकाल घोषित किये जाने पर भाषण, विचार, अभिव्यक्ति, शान्तिपूर्ण सभा करने, निःशस्त्र प्रदर्शन करने, सभा या समुदाय बनाने, देश में भ्रमण करने तथा किसी भाग में बसने की स्वतन्त्रता स्थगित हो जाती है । व्यवस्थापिका एवं कार्यपालिका द्वारा निर्मित कानून न्यायालय भी इसे अवैध घोषित नहीं करेंगे । आपातकाल में संवैधानिक उपचारों के अधिकारों पर भी स्थगन लग जाता है । 5. कुछ विद्वान् कहते है कि विद्यार्थियों को राजनीति का पहला पाठ विद्यालयों, महाविद्यालयों में ही सीख लेना चाहिए. What is Freebie politics? लोकमत निर्माण में बाधाएं: 1. राजनीति और धर्म को अलग रखना चाहिए.

Next

[ 600 शब्द ] Essay on Politics in Hindi

essay on politics in hindi

भारत में प्रधान मंत्री का चुनाव प्रत्येक 5 वर्षों में होता है। Students in school, are often asked to write Long essay on Politics in Hindi. अल्पसंख्यकों के साथ-साथ पिछड़े वर्गो के कल्याण पर बल है, 12. लोकतन्त्र की अवधारणा । 3. व्यावहारिक: भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकार कोरे सिद्धान्त न होकर व्यावहारिकता पर आधारित हैं । 4. वयरचा मताधिकार को महत्व है, 11. The political parties form a consensus on the common policies or path that they should take in communicating their ideas or policies to the people.

Next

[ 800 Words ] Essay on Politics in English ( Simple & Short )

essay on politics in hindi

राजनेता जनता की नब्ज को बड़ी गहराई से समझने वाले होते हैं. It has infiltrated nearly every aspect of society. उपसंहार: इस तरह स्पष्ट है कि भारतीय स्थानीय स्वशासन प्रजातन्त्र की ऐसी श्रेष्ठ व्यवस्था है, जो छोटी-छोटी इकाइयों में भी सफलतापूर्वक कार्य निव्यादन करती है । इस तरह सरकारी नियन्त्रण तीन तरह से होता है: 1. मगर सकारात्मक राजनीति के इस दौर में अब भारत लम्बे समय से चले आ रहे समाज को बांटने वाले विवादों का निपटान किया जा रहा हैं. अंग्रेजों की कूटनीति और कुछ भारतीय राजनेताओं के अहंकार ने भी भारत के टुकड़े करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. छोटी उम्र में राजनीति के दांवपेंचों में उलझना शिक्षा का माहौल खराब करना है.

Next