Biography of srinivasa ramanujan in hindi. श्रीनिवास रामानुजन का जीवन परिचय 2022-12-13

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श्रीनिवास रामानुजन (Srinivasa Ramanujan) एक भारतीय गणितज्ञ थे जो सन 1887 में भारत के तमिलनाडु राज्य में जन्मे थे। उन्होंने अपनी जीवनभर में अनेक गणितीय आयोजनों और सूचनाओं को जानकारी से सम्पादित किया जो आज भी विज्ञान और गणित में महत्वपूर्ण हैं।

रामानुजन का जीवन साधारणतया अधिकांश लोगों के लिए अजीब होता है, क्योंकि उन्होंने अपनी जीवनभर में कई सार्थक गणितीय सूचनाओं को सम्पादित किया जो अपने समय में जानने में असंभव थीं। उन्होंने अपने जीवन काफी अंधेरे में बिताया और अधिकांश समय तक अपनी आजीवनगाथा के बारे में जान

Srinivasa Ramanujan Hindi Biography

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Archived from PDF on 6 October 2016. Proceedings of the London Mathematical Society. फिर अक्टूबर 1918 में रामानुजन को ट्रिनिटी कॉलेज की सदस्यता प्रदान की गयी. दूसरी तरफ, उनके ज्ञान की रिक्तियां भी चौंकाने वाली हैं. Providence, Rhode Island: 978-0-8218-2023-0.

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Srinivasa Ramanujan Biography in Hindi । श्रीनिवास रामानुजन की जीवनी

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१६ ऑक्टोबर २०११ रोजी अशी घोषणा करण्यात आली की रॉजर स्पॉटिसवूड, जेम्स बाँड चित्रपटासाठी प्रसिद्ध आहे तो टूमॉरो नेव्हर डायज, सिद्धार्थ अभिनीत चित्रपट आवृत्तीवर काम करत आहे. रामानुजन यांना मार्च १९१६ मध्ये उच्च संमिश्र संख्यांवरील संशोधनासाठी कला शाखेची संशोधन पदवी लंडन मॅथेमॅटिकल सोसायटीच्या कार्यवाहीमध्ये प्रकाशित झाले होते. सन 1903 में उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय के प्रति छात्रवृति पाई,लेकिन गणित में मग्न रहने और अन्य विषयों की अनदेखी के कारण अगले ही साल उन्हें छात्रवृति से हाथ धोना पड़ा. उनके शोध पत्र अंग्रेजी एवं यूरोपीय पत्रिकाओं में छपे और सन, 1918 में वह पहले भारतीय बने,जिन्हें रायल सोसायटी आफ लंदन के लिए चुना गया. बिंदु POINTS जानकारी INFORMATION 1. क्योंकि ये सभी students के लिए बहुत बड़ी motivation हैं.

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Srinivasa Ramanujan Biography Hindi

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उपसंहार: रामानुजन सचमुच ही अदभुत, विलक्षण, असाधारण गणितज्ञ थे । 19वीं सदी के इस महान गणितज्ञ ने विश्व को अपने प्रमेय तथा सूत्रों की देन से चकित कर दिया । यदि उन्हें अधिक अवसर मिलते, वे बीमार नहीं होते और धार्मिक रूढ़ियों में नहीं जकड़े होते, तो वे अपनी विलक्षण प्रतिभा से गणित जगत् को और बहुत कुछ नया दे जाते । तथापि गणित जगत इस युवा गणितज्ञ को हमेशा उनकी अन्तर्प्रज्ञायुक्त विलक्षण प्रतिभा के कारण कभी विस्मृत नहीं कर पायेगा ।. पत्नी Wife Name जानकी 3. Srinivasa Ramanujan Ki Jivani श्रीनिवास रामानुजन अयंगर वे एक ऐसे गणितज्ञ थे, जिन्होंने गणित विषय में कभी कोई विशेष प्रशिक्षण नहीं लिया था, लेकिन फिर भी गणित के क्षेत्र में अपनी महान खोजों के माध्यम से एक महान गणितज्ञ के रुप में पूरे विश्व में अपनी एक अलग पहचान बनाई थी। आपको बता दें कि उन्होंने अपने अल्प जीवन काल में गणित की करीब 3900 प्रमेयों का संकलन किया और करीब 120 सूत्र लिखे थे। उनके द्धारा संकलित की गई प्रमेयों में से रामानुजन प्राइम और रामानुजन थीटा प्रसद्धि हैं। इसके अलावा उनकी शोधों को इंटरनेशनल प्रकाशन रामानुजन जर्नल में भी प्रकाशित किया है, ताकि उनके द्धारा किए गए गणित प्रयोगों का इस्तेमाल पूरे विश्व भर में किया जा सके। तो आइए जानते हैं गणित के क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने वाले इस महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन के जीवन के बारे में- महान भारतीय गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन का जीवन परिचय — Srinivasa Ramanujan Biography in Hindi श्रीनिवास रामानुजन की जीवनी एक नजर में — Srinivasa Ramanujan Information in Hindi पूरा नाम Name श्री निवास अयंगर रामानुजन जन्म Birthday 22 दिसंबर, 1887, इरोड गांव, मद्रास पिता Father Name श्रीनिवास अय्यंगर माता Mother Name कोमलताम्मल पत्नी Wife Name जानकी श्रीनिवास रामानुजन का प्रारंभिक जीवन — Srinivasa Ramanujan Life History श्रीनिवास रामानुजन 22 दिसम्बर 1887 को भारत के श्रीनिवास रामानुजन की शिक्षा — Srinivasa Ramanujan Education रामानुजन ने अपनी शुरुआती शिक्षा कुंभकोणम के प्राथमिक स्कूल से ही हासिल की थी। इसके बाद मार्च 1894 में, रामानुजन का दाखिला तमिल मीडियम स्कूल में करवाया गया। हालांकि, शुरु से ही गणित विषय से अत्याधिक लगाव की वजह से रामानुजन का मन पारंपरिक शिक्षा में नहीं लगता था। इसके बाद उन्होंने 10 साल की उम्र में प्राइमरी परीक्षा में जिले में सबसे अधिक अंक प्राप्त किए और आगे की शिक्षा टाउन हाईस्कूल से प्राप्त की। वे शुरु से ही काफी होनहार और मेधावी छात्र एवं सरल एवं सौम्य स्वभाव के बालक थे। उन्होंने अपने स्कूल के दिनों में ही उच्च स्तर की गणित का अच्छा ज्ञान हो गया था। वहीं गणित और अंग्रेजी विषय में रामानुजन के सबसे अच्छे अंक आने की वजह से उन्हें स्कॉलरशिप भी मिली थी, धीरे-धीरे रामानुजन गणित में इतने खो गए कि उन्होंने अन्य विषयों को पढ़ना तक छोड़ दिया था, जिसकी वजह से वे गणित को छोड़कर अन्य सभी विषयों में फेल हो गए और वे 12वीं में पास नहीं कर सके। विपरीत परस्थितियों में भी गणित के शोध चलाते रहे रामानुजन — Srinivasa Ramanujan Contribution To Mathematics रामानुजन को अपने युवावस्था में काफी संघर्ष का सामना करना पड़ा। उनके जीवन में एक दौर ऐसा भी आया था, जब वे गरीबी और बेरोजगारी से बुरी तरह जूझ रहे थे। वे किसी तरह ट्यूशन आदि पढ़ाकर अपना गुजर-बसर करते थे। वहीं गणित की शिक्षा हासिल करना उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन गया था। यहां तक की उन्हें लोगों के सामने भीख तक मांगनी पड़ी थी। लेकिन इन विपरीत परस्थितियों में भी श्रीनिवास रामानुजन ने कभी हिम्मत नहीं हारी और गणित से संबंधित अपनी रिसर्च जारी रखी। हालांकि इस दौरान उन्हें अपने काम के लिए सड़कों पर पड़े कागज उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा था, कई बार तो वे नीली स्याही से लिखे कागजों पर लाल कलम से लिखते थे। साल 1908 में रामानुजन की मां ने इनकी शादी जानकी नाम की लड़की से कर दी। इसके बाद वे अपनी शादीशुदा जिंदगी की जिम्मेदारी उठाने के लिए नौकरी की तलाश में मद्रास चले गए और लेकिन 12वीं में उत्तीर्ण नहीं होने के कारण उन्हें नौकरी नहीं मिली, दूसरी तरफ उनकी हेल्थ में भी लगातार गिरावट आ रही थी। जिसकी वजह से इन्हें वापस अपने घऱ कुंभकोणम का रुख करना पड़ा। हालांकि अपने दृढ़संकल्प के प्रति अडिग रहने वाले रामानुजन अपने स्वास्थ्य में सुधार होते देख एक बार फिर से मद्रास नौकरी की तलाश में चले गए और इस बार वे अपने गणित की रिसर्च को दिखाने लगे। फिर कुछ दिनों के कड़े संघर्ष और चुनौतियों के बाद उनकी मुलाकात वहां के डिप्टी कलेक्टर श्री वी. } या कल्पनेच्या सामान्यीकरणामुळे " टॅक्सीकॅब क्रमांक " ची कल्पना निर्माण झाली आहे. Srinivasa Ramanujan Hindi Biography के अलावे इसे भी पढ़ें: सन 1917 में रामानुजन को क्षय रोग हो गया, लेकिन हालत में कुछ सुधार के बाद 1919 ई.

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Srinivasa Ramanujan Biography in Hindi रामानुजन की जीवनी

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त्यांनी प्रत्येक निकालाची त्यांच्या तीन नोंदवहीमध्ये बारकाईने नोंद केली आहे," पुढे असा कयास लावला की रामानुजन यांनी स्लेटवर इंटरमीडिएट निकाल काढले की त्यांना पेपर कायमस्वरूपी रेकॉर्ड करणे परवडणारे नव्हते. पेशा PROFESSION गणितज्ञ Mathematician 7. इंटरनॅशनल सेंटर फॉर थिओरेटिकल फिजिक्स ICTP ने इंटरनॅशनल मॅथेमॅटिकल युनियनच्या सहकार्याने विकसनशील देशांतील तरुण गणितज्ञांसाठी रामानुजन यांच्या नावाने बक्षीस तयार केले आहे. इनकी माता जी का नाम कोमल तम्मल था. रामानुजन की मृत्यु Ramanujan Death 26 अप्रैल 1920 को TB Tuberculosis बीमारी के कारण रामानुजन ने अपने जीवन की अंतिम सांस ली. रामानुजन का व्यवहार बड़ा ही मधुर था। इनका सामान्य से कुछ अधिक स्थूल शरीर और जिज्ञासा से चमकती आखें इन्हें एक अलग ही पहचान देती थीं। इनके सहपाठियों के अनुसार इनका व्यवहार इतना सौम्य था कि कोई इनसे नाराज हो ही नहीं सकता था। विद्यालय में इनकी प्रतिभा ने दूसरे विद्यार्थियों और शिक्षकों पर छाप छोड़ना आरंभ कर दिया। इन्होंने स्कूल के समय में ही कालेज के स्तर के गणित को पढ़ लिया था। एक बार इनके विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने यह भी कहा था कि विद्यालय में होने वाली परीक्षाओं के मापदंड रामानुजन के लिए लागू नहीं होते हैं। हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद इन्हें गणित और अंग्रेजी मे अच्छे अंक लाने के कारण सुब्रमण्यम छात्रवृत्ति मिली और आगे कालेज की शिक्षा के लिए प्रवेश भी मिला। आगे एक परेशानी आई। रामानुजन का गणित के प्रति प्रेम इतना बढ़ गया था कि वे दूसरे विषयों पर ध्यान ही नहीं देते थे। यहां तक की वे इतिहास, जीव विज्ञान की कक्षाओं में भी गणित के प्रश्नों को हल किया करते थे। नतीजा यह हुआ कि ग्यारहवीं कक्षा की परीक्षा में वे गणित को छोड़ कर बाकी सभी विषयों में फेल हो गए और परिणामस्वरूप उनको छात्रवृत्ति मिलनी बंद हो गई। एक तो घर की आर्थिक स्थिति खराब और ऊपर से छात्रवृत्ति भी नहीं मिल रही थी। रामानुजन के लिए यह बड़ा ही कठिन समय था। घर की स्थिति सुधारने के लिए इन्होने गणित के कुछ ट्यूशन तथा खाते-बही का काम भी किया। कुछ समय बाद 1907 में रामानुजन ने फिर से बारहवीं कक्षा की प्राइवेट परीक्षा दी और अनुत्तीर्ण हो गए। और इसी के साथ इनके पारंपरिक शिक्षा की इतिश्री हो गई। औपचारिक शिक्षा की समाप्ति और संघर्ष का समय विद्यालय छोड़ने के बाद का पांच वर्षों का समय इनके लिए बहुत हताशा भरा था। भारत इस समय परतंत्रता की बेड़ियों में जकड़ा था। चारों तरफ भयंकर गरीबी थी। ऐसे समय में रामानुजन के पास न कोई नौकरी थी और न ही किसी संस्थान अथवा प्रोफेसर के साथ काम करने का मौका। बस उनका ईश्वर पर अटूट विश्वास और गणित के प्रति अगाध श्रद्धा ने उन्हें कर्तव्य मार्ग पर चलने के लिए सदैव प्रेरित किया। नामगिरी देवी रामानुजन के परिवार की ईष्ट देवी थीं। उनके प्रति अटूट विश्वास ने उन्हें कहीं रुकने नहीं दिया और वे इतनी विपरीत परिस्थितियों में भी गणित के अपने शोध को चलाते रहे। इस समय रामानुजन को ट्यूशन से कुल पांच रूपये मासिक मिलते थे और इसी में गुजारा होता था। रामानुजन का यह जीवन काल बहुत कष्ट और दुःख से भरा था। इन्हें हमेशा अपने भरण-पोषण के लिए और अपनी शिक्षा को जारी रखने के लिए इधर उधर भटकना पड़ा और अनेक लोगों से असफल याचना भी करनी पड़ी। विवाह और गणित साधना वर्ष 1908 में इनके माता पिता ने इनका विवाह जानकी नामक कन्या से कर दिया। प्रोफेसर हार्डी के साथ पत्रव्यावहार इस समय भारतीय और पश्चिमी रहन सहन में एक बड़ी दूरी थी और इस वजह से सामान्यतः भारतीयों को अंग्रेज वैज्ञानिकों के सामने अपने बातों को प्रस्तुत करने में काफी संकोच होता था। इधर स्थिति कुछ ऐसी थी कि बिना किसी अंग्रेज गणितज्ञ की सहायता लिए शोध कार्य को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता था। इस समय रामानुजन के पुराने शुभचिंतक इनके काम आए और इन लोगों ने रामानुजन द्वारा किए गए कार्यों को लंदन के प्रसिद्ध गणितज्ञों के पास भेजा। पर यहां इन्हें कुछ विशेष सहायता नहीं मिली लेकिन एक लाभ यह हुआ कि लोग रामानुजन को थोड़ा बहुत जानने लगे थे। इसी समय रामानुजन ने अपने संख्या सिद्धांत के कुछ सूत्र प्रोफेसर शेषू अय्यर को दिखाए तो उनका ध्यान लंदन के ही प्रोफेसर हार्डी की तरफ गया। प्रोफेसर हार्डी उस समय के विश्व के प्रसिद्ध गणितज्ञों में से एक थे। और अपने सख्त स्वभाव और अनुशासन प्रियता के कारण जाने जाते थे। प्रोफेसर हार्डी के शोधकार्य को पढ़ने के बाद रामानुजन ने बताया कि उन्होने प्रोफेसर हार्डी के अनुत्तरित प्रश्न का उत्तर खोज निकाला है। अब रामानुजन का प्रोफेसर हार्डी से पत्रव्यवहार आरंभ हुआ। अब यहां से रामानुजन के जीवन में एक नए युग का सूत्रपात हुआ जिसमें प्रोफेसर हार्डी की बहुत बड़ी भूमिका थी। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो जिस तरह से एक जौहरी हीरे की पहचान करता है और उसे तराश कर चमका देता है, रामानुजन के जीवन में वैसा ही कुछ स्थान प्रोफेसर हार्डी का है। प्रोफेसर हार्डी आजीवन रामानुजन की प्रतिभा और जीवन दर्शन के प्रशंसक रहे। रामानुजन और प्रोफेसर हार्डी की यह मित्रता दोनो ही के लिए लाभप्रद सिद्ध हुई। एक तरह से देखा जाए तो दोनो ने एक दूसरे के लिए पूरक का काम किया। प्रोफेसर हार्डी ने उस समय के विभिन्न प्रतिभाशाली व्यक्तियों को 100 के पैमाने पर आंका था। अधिकांश गणितज्ञों को उन्होने 100 में 35 अंक दिए और कुछ विशिष्ट व्यक्तियों को 60 अंक दिए। लेकिन उन्होंने रामानुजन को 100 में पूरे 100 अंक दिए थे। आरंभ में रामानुजन ने जब अपने किए गए शोधकार्य को प्रोफेसर हार्डी के पास भेजा तो पहले उन्हें भी पूरा समझ में नहीं आया। जब उन्होंने अपने मित्र गणितज्ञों से सलाह ली तो वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि रामानुजन गणित के क्षेत्र में एक दुर्लभ व्यक्तित्व है और इनके द्वारा किए गए कार्य को ठीक से समझने और उसमें आगे शोध के लिए उन्हें इंग्लैंड आना चाहिए। अतः उन्होने रामानुजन को कैंब्रिज आने के लिए आमंत्रित किया। विदेश गमन कुछ व्यक्तिगत कारणों और धन की कमी के कारण रामानुजन ने प्रोफेसर हार्डी के कैंब्रिज के आमंत्रण को अस्वीकार कर दिया। प्रोफेसर हार्डी को इससे निराशा हुई लेकिन उन्होनें किसी भी तरह से रामानुजन को वहां बुलाने का निश्चय किया। इसी समय रामानुजन को मद्रास विश्वविद्यालय में शोध वृत्ति मिल गई थी जिससे उनका जीवन कुछ सरल हो गया और उनको शोधकार्य के लिए पूरा समय भी मिलने लगा था। इसी बीच एक लंबे पत्रव्यवहार के बाद धीरे-धीरे प्रोफेसर हार्डी ने रामानुजन को कैंब्रिज आने के लिए सहमत कर लिया। प्रोफेसर हार्डी के प्रयासों से रामानुजन को कैंब्रिज जाने के लिए आर्थिक सहायता भी मिल गई। रामानुजन ने इंग्लैण्ड जाने के पहले गणित के करीब 3000 से भी अधिक नये सूत्रों को अपनी नोटबुक में लिखा था। रामानुजन ने लंदन की धरती पर कदम रखा। वहां प्रोफेसर हार्डी ने उनके लिए पहले से व्ववस्था की हुई थी अतः इन्हें कोई विशेष परेशानी नहीं हुई। इंग्लैण्ड में रामानुजन को बस थोड़ी परेशानी थी और इसका कारण था उनका शर्मीला, शांत स्वभाव और शुद्ध सात्विक जीवनचर्या। अपने पूरे इंग्लैण्ड प्रवास में वे अधिकांशतः अपना भोजन स्वयं बनाते थे। इंग्लैण्ड की इस यात्रा से उनके जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन आया। उन्होंने प्रोफेसर हार्डी के साथ मिल कर उच्चकोटि के शोधपत्र प्रकाशित किए। अपने एक विशेष शोध के कारण इन्हें कैंब्रिज विश्वविद्यालय द्वारा बी.

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श्रीनिवास रामानुजन

biography of srinivasa ramanujan in hindi

आईकडून ते परंपरा आणि वयाच्या ११ व्या वर्षी लहान वयातच त्यांनी त्यांच्या घरी राहणाऱ्या दोन महाविद्यालयीन विद्यार्थ्यांएवढे गणिताचे ज्ञान मिळवले होते. रामानुजन इतने मेधावी छात्र थे कि स्कूल के समय में ही उन्होंने कालेज स्तर तक का गणित पढ़ लिया था. प्रस्तावना: महान गणितज्ञ रामानुजन भारत के उन महान् गणितज्ञों में से एक थे, जिनकी अदभुत गणितीय अन्तर्प्रज्ञाशक्ति से सारा देश ही नहीं, विश्व भी चकित था । इस असाधारण प्रतिभाशाली, महान् एवं युवा गणितज्ञ की मेधा, प्रतिभा इतनी विलक्षण थी कि बाल्यावस्था से ही उन्होंने गणित के कई मौलिक सिद्धान्तों को न केवल जन्म दिया, अपितु उसका प्रतिपादन भी व्यावहारिक रूप से विविध रूपों में करके दिखला दिया । उनका जीवन चरित्र पराधीनता के अभिशाप से ग्रसित उस असाधारण प्रतिभा के असमय काल-कवलित हो जाने से है, जिसकी कराणगाथा यह बताती है कि रामानुजन की कहानी चुके हुए अवसर की जीवनगाथा है । 2. . में वह भारत लौट आए.

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Srinivasa Ramanujan का जीवन परिचय?। Srinivasa Ramanujan biography in hindi

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प्राइमरी परीक्षा में उन्होंने पूरे जिले में सर्वाधिक अंक प्राप्त किये. आज रामानुजन हमारे बीच नहीं है लेकिन उनके द्वारा दिये गये योगदानों व कार्यों को हम कभी भी भुला नहीं पायेंगे. हे पुस्तक जीएस कार यांच्या ५,००० प्रमेयांचा संग्रह होते. हा पेपर ५० पेक्षा जास्त पानांचा होता आणि त्याने अशा संख्यांचे विविध गुणधर्म सिद्ध केले. रामनुजन का व्यक्तिव बड़ा सरल और सौम्य था. श्रीनिवास की गणित विषय में अत्यधिक रुचि होने के कारण उन्होंने बाकि अन्य विषय पढना छोड़ दिया था.


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श्रीनिवास रामानुजन जीवन परिचय

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हार्डी यांना या विषयाचे क्षेत्र आवडले नाही परंतु त्यांनी टिप्पणी केली की ते ज्याला 'गणिताचे बॅकवॉटर' म्हणतात त्यामध्ये गुंतले असले तरी त्यात रामानुजनने 'असमानतेच्या बीजगणितावर विलक्षण प्रभुत्व' दाखवले. Archived from PDF on 21 June 2007. जन्म स्थान BIRTH PLACE तमिलनाडु के कोयंबटूर के ईरोड नामक गांव में 5. He did many researches for mathematics in his life, which is still helpful in solving complex numbers easily. A to Z of mathematicians.

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श्रीनिवास रामानुजन की जीवनी

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हाऊस ऑफ रामानुजन मॅथेमॅटिक्स हे रामानुजन यांच्या जीवनाचे आणि कार्याचे संग्रहालय देखील याच कॅम्पसमध्ये आहे. कृशची थ्रिलर कादंबरी द स्टेरॅडियन ट्रेल रामानुजन आणि त्यांचा अपघाती शोध धर्म, गणित, वित्त आणि अर्थशास्त्र यांना जोडणाऱ्या कथानकात विणते. त्याचप्रमाणे, फ्रंटलाइनला दिलेल्या मुलाखतीत, बर्नडट म्हणाले, "अनेक लोक रामानुजनच्या गणितीय विचारांना गूढ शक्तींचा खोटा प्रचार करतात. हार्डी के पास भेजे. Ramanujan: Twelve Lectures on Subjects Suggested by His Life and Work. कुंभकोणम येथे रामानुजन राहत होते ते घर या विद्यापीठाने विकत घेऊन त्याचे नूतनीकरण केले आहे. जब रामानुजन 15 साल के थे, उन्होंने जार्ज शूब्रिज कार की सिनौप्सिस आफ एलीमेंट्री रिजल्टस इन प्योर एंड अप्लाइड मैथेमेटिक्स, दो खंड 1980 — 86 की एक प्रति प्राप्त की.


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महान गणितज्ञ

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मृत्यु के समय उनकी आयु सिर्फ 33 वर्ष की थी. Srinivasa Ramanujan early life जब Ramanujan ढेड साल के थे तब उनकी माँ ने एक और बेटे को जन्म दिया, मगर उसकी मौत महज तीन महीने की उम्र में हो गयी। इसके बाद साल 1889 में रामानुजन को smallpox की बीमारी हो गयी, मगर कुछ ही समय में वह पूरी तरह ठीक हो गए। उस साल Thanjavur district के इलाके में काफी लोगो को ये बीमारी हुई थी, और लगभग चार हज़ार लोगों की मौत भी इस बीमारी के कारण हो गयी थी। इसके बाद Ramanujan की माँ उन्हें लेकर अपने माता-पिता के घर रहने चली गयी, जो की Madras के करीब kanchipuram नामक जगह में था। जन्म 22 दिसम्बर , 1887 माता का नाम कोमलताम्मल पिता का नाम श्रीनिवास अय्यंगर पत्नी का नाम जानकी जन्म स्थान इरोड , तमिल नाडू कार्यशैली गणित उपलब्धियाँ लैंडॉ-रामानुजन् स्थिरांक, रामानुजन्-सोल्डनर स्थिरांक, रामानुजन् योगरामानुजन् थीटा फलन, रॉजर्स-रामानुजन् तत्समक, रामानुजन् अभाज्य, कृत्रिम थीटा फलन मृत्यु 26 अप्रैल , 1920 बचपन से ही Srinivasa Ramanujan का मन ज्यादा तर गणित में ही लगता था, और बाकी विषयों में उन्हें कभी कोई रूचि नही थी। उन्होंने दस वर्ष की उम्र में अपनी primary परीक्षा में पूरे जिले में सर्वोच्च अंक प्राप्त किए, और फिर अपने आगे की पढ़ाई के लिए टाउन हाईस्कूल गए। Ramanujan का व्यवहार शुरु से ही दुसरो के प्रति काफी अच्छा था। धीरे-धीरे उनकी प्रतिभा ने बाकी के विद्यार्थियों और शिक्षकों पर अपनी छाप छोड़ना शुरू कर दिया। उनकी गणित इतनी अच्छी थी की, स्कूल के समय से ही उन्होंने college में पढाए जाने वाले गणित को भी अच्छे से सिख कर पूरा कर लिया। अपनी हाईस्कूल की परीक्षा में उन्होंने गणित और अंग्रेजी मे अच्छे अंक प्राप्त किए, और इसके कारण उन्हें छात्रवृत्ति मिली, जिससे कॉलेज की शिक्षा का रास्ता और आसान हो गया। मगर थोड़े समय में ही उनका ये गणित प्रेम उनके ही ऊपर भारी पड़ा। दरअसल वो गणित में इतना ज्यादा खोए रहते थे की उन्होंने बाकी के विषयों में ध्यान देना बिलकुल बंद ही कर दिया। वह दूसरी विषयों की class में भी गणित ही पढ़ा करते थे। इसका परिणाम ये हुआ की, कक्षा 11वीं की परीक्षा में वे गणित को छोड़ बाकी सभी विषयों में अनुत्तीर्ण हो गए, जिसके कारण उनको मिलने वाली छात्रवृत्ति बंद हो गई। और परिवार की आर्थिक स्थिति सही न होने के कारण, उनकी आगे की पढ़ाई में भी काफी ज्यादा परेशानी होने लगी। Srinivasa Ramanujan का परिवार? इसके बाद उनकी प्रारभिक शिक्षा समाप्त हो गई. इन्होंने संख्या सिधांत का प्रतिपादन किया. इस कारण उनके माता-पिता चिंतित रहते थे. उन्होंने रीमैन श्रेणी, दीर्घ समाकलन, हाइपरज्योमेट्रिक श्रेणी, जीटा फलन के फलनिक समीकरणों को हल किया तथा अपसारी श्रेणी का अपना सिधांत खोज निकला.

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श्रीनिवास रामानुजन का जीवन परिचय

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ऐसा करने वाले वे पहले भारतीय थे. जानेवारी १९२० मध्ये लिहिलेल्या हार्डी यांना लिहिलेल्या शेवटच्या पत्रांवरून असे दिसून येते की तेव्हादेखील ते नवीन गणिती कल्पना आणि प्रमेय तयार करत होते. रामानुजन के गणितीय कौशल से प्रभावित होकर राव ने कुछ समय तक उनके अनुसंधान में सहायता की, लेकिन दान पर निर्भर रहने के अनिच्छुक रामानुजन ने मद्रास बंदरगाह न्याय में लिपिक पद पर काम करना शुरू कर दिया. रामानुजन का प्रांरभिक जीवन Ramanujan Intial Life बालक रामानुजन की सिर्फ गणित के विषय में रुचि अधिक थी. Oxford BBC Guide to Pronunciation. धर्मं Religion हिन्दू 7. गणित और रामानुजन । 4.


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